
यश कायरकर :
सोलापुर में वन विभाग द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई में घोरपड़ (Monitor Lizard) के गुप्त अंगों की तस्करी करने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई आज 2 मार्च को की गई, जब वन विभाग को गुप्त सूचना मिली कि कुछ लोग सोलापुर रेलवे स्टेशन पर घोरपड़ के गुप्त अंगों की बिक्री करने वाले हैं।
सूचना के आधार पर, वन विभाग की टीम ने सुबह से ही रेलवे स्टेशन पर नजर रखनी शुरू की। कुछ ही देर में संशयित आरोपी एक चार पहिया वाहन में घोरपड़ के गुप्त अंग लेकर पहुंचे। खबरी की निशानदेही पर, वन अधिकारियों ने तुरंत तीनों आरोपियों को दबोच लिया। तलाशी लेने पर 151 घोरपड़ के गुप्त अंग बरामद हुए।

गिरफ्तार आरोपी और उनका आपराधिक इतिहास:
गिरफ्तार तीनों आरोपी शातिर तस्कर बताए जा रहे हैं, जो इससे पहले भी वन्यजीव तस्करी में संलिप्त रह चुके हैं।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम:
विठ्ठल सुग्रीव पाटोळे (29 वर्ष)
सुग्रीव रंगनाथ पाटोळे (60 वर्ष)
(दोनों निवासी: पिंपळा, तहसील वडवणी, जिला बीड)
बाळासाहेब लक्ष्मण डोरले (34 वर्ष)
(निवासी: चिखल, जिला बीड)
कानूनी कार्रवाई और दंड:
घोरपड़ वन्यजीव वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची-1 (Schedule I) में संरक्षित प्रजाति है, जिसे उच्चतम श्रेणी का संरक्षण प्राप्त है।
इसकी शिकार और तस्करी करने पर 10,000 रुपये का जुर्माना और 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।
गिरफ्तार आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराएं 2(2), 9, 39, 40, 48A, 49A, 49B, 50, 51 और 57 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में योगदान देने वाले अधिकारी:
इस ऑपरेशन का नेतृत्व सोलापुर वन विभाग द्वारा किया गया, जिसमें कई वरिष्ठ अधिकारी और वन रक्षक शामिल थे:
अप्पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक – डॉ. क्लेमेंट बेन
मुख्य वन संरक्षक – एन.आर. प्रवीण
उपवन संरक्षक – महादेव मोहिते
सहायक वन संरक्षक – अजित शिंदे
वन क्षेत्रपाल – रोहितकुमार गांगर्डे
वनपाल – रुकेश कांबळे
वन रक्षक – श्रीशिल पाटील, आश्विनी सोनके, योगेश जगताप, सायली ठोंबरे, रमेश कुंभार, सुरेश कुरले, रेणुका सोनटक्के, अनिता शिंदे, नितीन चराटे
वाहन चालक – कृष्णा निरवणे
वन्यजीव संरक्षक और एनजीओ का सहयोग:
इस कार्रवाई में मानद वन्यजीव रक्षक सातारा रोहन भाटे और हेमंत केंजळे (क्रिएटिव नेचर फ्रेंड्स, कराड) ने भी अहम भूमिका निभाई।
वर्तमान में गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है ताकि इस वन्यजीव तस्करी गिरोह के अन्य सदस्यों और उनकी अंतरराज्यीय संलिप्तता का पता लगाया जा सके।
(वन विभाग की इस कार्रवाई से वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी गंभीरता और प्रतिबद्धता साबित होती है। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो वन्यजीवों की तस्करी और शिकार की घटनाएं बढ़ सकती हैं।)





