अब तक 25 मौतें ; जिले में बाघ तेंदुए के हमले बड़े, जिम्मेदारी किसकी

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इस साल मौतों का यह बढ़ता हुआ आंकड़ा और औसत से देखा जाए तो जिले में ही हर महीने 4 लोग वन्यजीव हमले में मारे जा रहे हैं! जो कि यह आंकड़ा वन विभाग, वन्यजीव प्रेमी, और आम लोगों के माथे पर चिंता की लकीरे बढ़ाने वाला है ! इस पर तुरंत और गंभीरतापूर्वक हम सभी को मंथन करना बेहद जरूरी हो गया है!
इन बाघों, तेंदुए के हमले और इंसानी मौतों की हालात और हकीकत सभी जानते हैं! पर जिम्मेदारी कोई उठा नहीं रहा है! यहां सभी अपनी गलतियां छुपा कर सिर्फ वन विभाग और बाघ – तेंदुए को ही जिम्मेदार मानने लगे हैं !आज माना कुछ इजाफा हुआ है बाघों की तादात में! पर उनके अधिवास पर बड़ी मात्रा में विपरीत असर भी दिखाई दे रहा है! जो गंभीर मुद्दा बन रहा है! रोज रोज ही अतिक्रमण बढ़ते जा रहे हैं, जंगल जलाते – काटते जा रहे हैं! लोग जंगलों के भीतर तक जाकर शिकार कर इन पशुओं का खाना चुराकर खाने लगे हैं! लकड़ियों के, लिए महुआफूल , तेंदूपत्ता , वन सब्जी लाने या मवेशी चराने के लिए जंगलों के काफ़ी भीतर तक, मौत के मुंह में घुसते जा रहे हैं! और बाघ तेंदुआ भालू जैसे जानवरों का निवाला बनते जा रहे हैं ! या खुद अपनी मौत का न्योता लेकर जा रहे हैं ! जो भी हो पर यह आंकड़े तो बढ़ते ही जा रहे हैं और सभी की दिक्कतें भी!
लोग जंगलों पर, जंगली संपत्तियों पर, मोर ,सूअर, हिरन, गोह जैसे जानवर – पंछियों पर अपना हक जता कर उन्हें मार कर खाते जा रहे हैं! पर सिर्फ और सिर्फ बाघ, तेंदुआ , भालू, सांप इन जानवरों को वन विभाग , वन्यजीव प्रेमी , सर्पमित्र इन के ही मानने लगे हैं! वन्यजीव के हमले की कोई भी वारदात होती है चाहे वह जंगलों के काफी अंदर ही क्यों ना हो तो तुरंत ही लोग उनके लिए सिर्फ वनविभाग को ही जिम्मेदार मान कर हो हल्ला मचा देते हैं! कोई भी वन्यजीव वन विभाग द्वारा पाला या सिखाया हुआ नहीं होता है! वह सिर्फ वन विभाग उनके रखवालदार ही होते हैं ! वह जंगलों के रखवाले होते हैं! वह कभी नहीं चाहते कि वन्यजीव और मानव संघर्ष हो, हालात बिगड़ जाए, पर कुछ नासमझ और समाज कंटक इन हालातों को बद से बदतर करने में व्यस्त हो जाते हैं! और वन्य जीव हमलों की घटनाओं से वन विभाग को जोड़ देते हैं!
ऐसी घटनाओं से निजात पाना है तो , लोगों को खुद अब अनहोनीओं की वजह समझ कर खुद भी कुछ जिम्मेदारियां उठानी होगी! लोग कितना भी कर ले खुद इन हालातों पर काबू नहीं कर सकते ! माना हो हल्ला मचा कर एक इलाके से कैसेभी बाघ को खदेड़ भी दे ! पर दूसरे इलाके में वही हालात पैदा होंगे ही ! सिर्फ बाघ पकड़ने से , मारने से , यह समस्या हल नहीं हो सकती! वरना एक दिन ना बाघ रहेगा नाही जंगल, पेड़ पौधे नहीं तो बरसात भी नहीं! और रेगिस्तान सी सारी खेतियाॅं विरान हो जाएगी! इसलिए बाघ पकड़ने या मारने से नहीं, समझने और स्वीकारने से ! वन विभाग को कोसने या पीटने से नहीं, सुनने और सहयोग करने से ! मानव वन्यजीव संघर्ष को टाला जा सकता है!
वन विभाग हमेशा अपनी जान जोखिम में डालकर जंगलों की रखवाली करता है! मानव और वन्य जीव दोनों को बचाने की कोशिश में लगा रहता है! इसलिए हमेशा वन विभाग द्वारा निर्देशित सूचनाओं का पालन भी करना लोगों को जरूरी है! जिससे मौत के यह बढ़ते हुए आंकड़े, जंगल, खेतीयों का विनाश जैसी बड़ी अनहोनी को टाला जा सकता है!
अब वनविभाग को भी सिर्फ अपने तक ही सीमित ना रह कर , उन्हें वन्यजीव प्रेमी जो कि जंगल – जंगली जानवर, वनविभाग – किसान, और आम लोगों के बीच समन्वय बनाने के लिए लगे रहते हैं! उनका साथ लेना और देना भी वनविभाग को जरूरी हो गया है! लोगों की और किसानों की भी समस्याएं सुनना – सुलझाना और समझाना जरूरी हो गया है! सिर्फ दिन – रात गस्त करने से ही नहीं, लोगों को सचेत करना भी अभी जरूरी हो गया है! अब सिर्फ वनविभाग ही नहीं वन्यजीव प्रेमी, जंगल से सटे किसान, जंगल से सटे गांव के आम नागरिक, सभी को इस बात पर गंभीरता से मंथन करना और इन घटनाओं को रोकना अब बहुत जरूरी हो गया है!

✍️ यश कायरकर (९८८१८२३०८३)

(अध्यक्ष ,स्वाब नेचर केयर)

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