ताड़ोबा अंधारी टायगर रिझर्व मे बैटरी चलित जिप्सी सफारी से हुआ आधुनिक टायगर परियोजना का शुभारंभ

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चंद्रपुर (मोहम्मद सुलेमान बेग): ताडोबा अंधारी टायगर रिझर्व  भारत में पहला टायगर रिझर्व है, जिसमें स्थानीय लोगों ने बैटरी चलित जीप्सी सफारी का आयोजन किया है। और वनविभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की सहायकता से, उन्हें 4.75 लाख रुपये का ऋण मिला है और वाहनों को सुरक्षित रूप से चलाने के लिए तैयार किया गया है।

वनविभाग के प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यजीव) महीप गुप्ता, ताड़ोबा के क्षेत्र निदेशक डाॅ.  जितेंद्र रामगांवकर के मार्गदर्शन में बैटरी चालित जिप्सियों के प्रयोग के लिए ताडोबा के बफर झोन में जुनोना, कोलारा, नवेगांव और मामल के प्रवेश द्वारों पर बैटरी चालित जिप्सी सफारी तैनात की गई है। इससे पर्यावरण पर असर कम होगा और पर्यटकों को जंगल सफारी में एक नया अनुभव मिलेगा। बैटरी चलित वाहनों की नियमित सफारी के लिए इस योजना की तैयारी हो रही है और राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने इसे समर्थन दिया है। महाराष्ट्र के वनमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने भी इसे समर्थन दिया है।

इस संदर्भ में, ताड़ोबा अंधारी टायगर रिझर्व के उपसंचालक (बफर) कुशाग्र पाठक ने मुख्य भूमिका निभाई और मोहर्ली बफर वनपरिक्षेत्र अधिकारी संतोष तिपे के सहयोग से आज 9 दिसंबर 2023 को जुनोना प्रवेश द्वार से बैटरी चालित जिप्सी को दोपहर फेरी के नून सफारी मे शुभारंभ किया गया।
इस सफारी में पुणे से आये सैलानी मेहुल शाह ने पहली बैटरी चलित जीप्सी से सफारी की। उनसे बातचीत करते हुए, उन्होंने वनसमाचार के प्रतिनिधि से कहा, “हमने ताड़ोबा में 3 सफारी कीं, जिनमें 2 सफारी बफर में आगरझरी और जुनोना प्रवेश द्वारों से की गई और एक सफारी मोहर्ली कोअर में की गई। उस दौरान, जुनोना बफर सफारी में बैटरी चलित जिप्सी से सफारी की, जिसमें जिप्सी की ध्वनि कम आती है, जिससे वन्यजीवों को कोई परेशानी नहीं होती और गाड़ी मे बैठने से आराम मिलता है। इसके अलावा, यह पर्यावरण के प्रति मित्रशील भी है। इस तरह की जिप्सी को ताड़ोबा में लाना बहुत आवश्यक है ऐसा मुझे लगता है,” उन्होंने ऐसा कहा।

इसके बाद, मोहर्ली बफर के वनपरिक्षेत्र अधिकारी संतोष तिपे ने कहा -“बफर के प्रत्येक प्रवेश द्वार पर इस तरह का प्रयोग को किया जाना चाहीए है। बफर एरिया में महिलाओं को ड्राइविंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है तो उन्हें इन बैटरी चालित जिप्सियों पर चालक के रूप में रखा जाए ताकि महिलाएं सशक्त हो सकें।

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