बांस संशोधन केंद्र में आग की घटना पर रहस्य बना पूर्व वन मंत्री ने की सीआईडी जांच की मांग अधिकारियों की लापरवाही का भी लगा आरोप

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चंद्रपुर (वनसमाचार सेवा)
चंद्रपुर-मूल मार्ग पर चिचोली में निर्माणाधीन बांबू रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर की करोड़ों की इमारत को गुरुवार दोपहर अचानक आग लग गई। इस घटना पर अब रहस्य के बादल छाने लगे हैं। तरह-तरह के संदेह और तर्क वितर्क जताए जा रहे हैं। एक तरफ पूर्व वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने इस मामले की सीआईडी जांच कराने की मांग की है वहीं दूसरी तरफ उलगुलान संगठन ने अधिकारियों की लापरवाही होने की बात कहते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। बहराल कल ही जिले के पालक मंत्री विजय वडेट्टीवार ने इस घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
वन विभाग और टाटा के साथ ही केंद्र सरकार को मिलाकर करीब 600 करोड़ की लागत से यह प्रकल्प बन रहा है। इस प्रकल्प में बांबू से रोजगार निर्माण के साथ ही बांबू से जुड़े संशोधन पर जोर दिया जाएगा। इस भव्य इमारत का जब निर्माण शुरू हुआ था तभी यह अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आई थी। बंबू की इतनी बड़ी विशाल इमारत एशिया में नहीं है। इस तरह से सुर्खियों में रही इस इमारत के निर्माण कार्य के दौरान कई और बातें भी सामने आती रही। जैसे इमारत पूरी होने के पूर्व ही इमारत में दरारे या खामियां आई थी। यह इमारत घटिया दर्जे की बनाई जा रही थी। इस ओर वन विभाग के साथ संबंधित उच्चाधिकारियों का ध्यान नहीं होने के आरोप भी लगते रहे हैं। हालांकि इस इमारत के निर्माण का ठेका बाहरी कंपनियों को दिया गया है। इस बीच गुरुवार को दोपहर इस परिसर के प्रशासकीय संकुल और अन्य इमारत को आ गई। यह आग कैसे लगी, इसके कारण क्या है, यह आग लगाई गई या प्राकृतिक तरीके से भड़की? इसे लेकर 24 घंटे बाद भी कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है। कल सभी उच्चाधिकारियों के साथ चंद्रपुर के विधायक किशोर जोरगेवार ने भी घटनास्थल से भेंट की थी। इस आग की भीषणता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि करीब एक किलोमीटर की दूरी से इसकी लपटे महसूस की जा रही थी। इस परिसर में समृद्ध जंगल भी है। इस आग से यहां के पेड़ पौधे, वन्य जीव व आबोहवा का नुक़सान होने के अनुमान को लेकर पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी है। उल्लेखनीय है कि जिस केंद्र को आग लगी उसका उद्घाटन भी हुआ नहीं है।
*दिसंबर में हुई थी शिकायत*
१० दिसंबर २०२०को यहां चल रहे निर्माण कार्य को लेकर बांधकम विभाग से शिकायत की गई थी। इस शिकायत में कहा गया था कि ठेकेदार पटेल व जेवी कंपनी की यहां के बांध काम विभाग के अधिकारियों से साठ गांठ के कारण कार्य घटिया दर्जे का हो रहा है। छत टपकने लगा है। पटेल कंपनी को ११ करोड़ ८६ लाख ८७ हजार का ठेका मिला है। वहीं जेवी कंपनी को २८ करोड़ ३० लाख का ठेका यहां मंजूर है। अधीक्षक अभियंता सुषमा साखरवाडे ने २४ दिसंबर २०२० को जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा था, पर अब तक किसी प्रकार की कोई जांच या रिपोर्ट ही नहीं बनी। यह जानकारी शिकायतकर्ता संजीवनी पर्यावरण सामाजिक संस्था के प्रमुख राजेश बेले ने दी।
*फायर सेफ्टी होकर भी लगी आग*
बांध काम विभाग के कार्यकारी अभियंता भास्करवार ने माना कि जहां भीषण आग लगी उस बीआरटीसी में फायर सेफ्टी थी। बावजूद इतनी बड़ी आग भड़की कैसे? ऐसा सवाल पर्यावरण कार्यकर्ता राजेश बेले ने पूछा है। सनद रहे इस आग के कारणों का अब तक कोई खुलासा नहीं हो पाया है।
*पालक मंत्री ने लिया जायजा*
शुक्रवार को दोपहर जिले के पालक मंत्री विजय वडेट्टिवार ने इस इमारत का दौरा किया। इस समय उनके साथ मीडिया भी उपस्थित था। पालक मंत्री ने कल ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करने के आदेश दिए थे। आज उन्होंने इस इमारत में आग से हुए नुक़सान का जायजा लिया। सनद रहे यह प्रकल्प भाजपा के काल में मजुर हुआ था। जिसके उस समय के वन मंत्री सुधीर मुंगंटीवार ने इस आग की सीआईडी जांच की मांग कल ही की थी।

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