
भंडारा (संदीप कालबांधे): मौजा बपेरा शिवर में बावनथडी परियोजना की एक छोटीसी नहर में 31 मार्च 2022 को मृत मिला था। इस बाघ की मौत के मामले में वन विभाग की जांच में देर रात गांव के दो आरोपियो को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस विभाग के बल से डॉग स्कॉर्ड की मदद से 02 एप्रिल 2022 की सुबह एक बार फिर क्षेत्र का निरीक्षण किया गया।
साकेत शेंडे, सहायक वनसंरक्षक, विस्तार अधिकारी, गडेगांव के नेतृत्व में क्षेत्र में मिले साक्ष्यों के आधार पर वनविभाग द्वारा पांच स्थानीय संदिग्धों की गहनता से जांच की गई।
आरोपी तुलसीराम दशरथ लिल्हारे के खेत में वनविभाग के अधिकारियों ने कुछ जंगली जानवरों की हड्डियाँ, कंकाल, बिजली के करंट में इस्तेमाल होने वाले डंडे और अन्य सामग्री को जब्त किया गया।
आरोपी के खेत में बाघ के पैरों के निशान मिले हैं। इन मामलों में जांच के बाद आरोपी तुलसीराम दशरथ लिल्हारे और उनके बेटे शशिकांत तुलसीराम लिल्हारे को वनविभाग ने देर रात 02 एप्रिल 2022 को गिरफ्तार कर लिया गया है।
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने बिजली के करंट से बाघ का अवैध रूप से शिकार किया और बैलगाड़ी से बाघ को खेत के पास नहर में लेके आए।
दोनों आरोपियो को 03 एप्रिल 2022 को प्रथम श्रेणी न्यायालय, तुमसर के मजिस्ट्रेट समक्ष पेश किया गया।
अदालत ने फैसला सुनाया है कि वन अपराध गंभीर है और आरोपियों को पांच दिनों के लिए हिरासत में भेज दिया गया है।
भंडारा जिले में इस साल अवैध बाघ शिकार की यह दूसरा मामला है। यदि भंडारा जिले में बाघों को जीवित रहना है, तो किसानों के लिए बिजली के करंट की प्रथा को रोकना अनिवार्य है।
बाघ वन खाद्य श्रृंखला का सर्वोच्च घटक है और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए जिन जंगलों में बाघ घूमते हैं उन्हें समृद्ध माना जाता है।
भारतीय वन्यजीव अधिनियम, 1972 के अनुसार, बाघ एक जंगली जानवर है जिसे अनुसूची 1 में शामिल किया गया है और इसे कानून द्वारा सर्वोच्च संरक्षण दिया गया है। बाघों का शिकार करने के आरोपी को 3 से 7 साल की कैद की सजा हो सकती है।
बापेरा बाघ शिकार मामले में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए वनविभाग हर संभव प्रयास करेगा। और साथ ही जिले के सभी किसानों को बिजली के करंट से जंगली जानवरों का शिकार करने की प्रथा को रोकने की चुनौती दे रहा है।



