नागभीड- सिंदेवाही क्षेत्र में  दुर्लभ “ब्लैक ईगल”  दुसरी बार पक्षी निरीक्षन में कैमरे में कैद

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जिल्हा प्रतिनिधी (यश कायरकर) :  एक दुर्लभ “इंडियन ब्लैक ईगल”  हाल ही में यह गरुड़  नागभिड वनपरिक्षेत्र अंतर्गत घोडाझरी अभयारण्य क्षेत्र से जुड़े किटाली तालाब में पाया गया है. हिमालय में प्राकृतिक आवास वाले इस ईगल का महाराष्ट्र में बहुत कम रिकॉर्ड है । इसके पहले फरवरी २०२१ मे इसे सिंदेवाही वनपरिक्षेत्र के आंबोली पत्थर खदान के समिप पक्षी निरीक्षक रोशन धोतरे ने इस ब्लैक इगल को कैमरे में कैद किया है. जिससे यह ईगल सिंदेवाही नागभीर परिक्षेत्र में ही कुछ सालों से स्थापित होने की संभावना है ।

सर्दियों में चंद्रपुर जिले के जलाशय में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी देखने को मिलते हैं । जिसमें (बार हेडेड गूज) ‘राजहंस’ जो विदेशी पक्षी है जो पक्षी निरीक्षक के लिए आकर्षण के केंद्र हैं और ख़ास कर नागभीड, सिंदेवाही जलाशयों में बड़ी संख्या में उनकी उपस्थिति दर्ज कराई जाती है और इनके निरीक्षण और फोटोग्राफी के लिए पक्षी निरीक्षक इन दिनों जलाशयों में जाते हैं । इसी के चलते नागभीड के पक्षीतज्ञ डॉ. जी.डी.देशमुख इनके मार्गदर्शन में प्रा. निखिल बोराडे, प्रा.अमोल रेवस्कर और संजय सुरजुसे किटाली झील क्षेत्र में बर्ड वाचिंग के लिए गए थे । तभी तालाब के बांध पर एक बड़े पेड़ पर यह काला गरुड़ नजर आया. इस ईगल का शास्त्रीय नाम, जिसे भारत में ब्लैक ईगल के रूप में जाना जाता है। “इक्टिनिट्स मलाइन्सिस” है  इसका हिमालयी पर्वत परिसर मुख्य अधिवास  और  मैदानी इलाकों में इसकी नोंद कम ही दर्ज कराई गई है।
इस तरह दिखता है यह काला गरुड़. जैसा कि इसके परों का रंग पूरी तरह से  डार्क ब्राउनी काला है, जिस कारण इसे ब्लैक ईगल नाम मिला. इसकी चोंच का निचला भाग गहरा पीला होता है. पैर गहरे पीले रंग के होते हैं. यह शिकार का पक्षी है. और यह सांप, चूहे, गिरगिट,  और छोटे पंछीयोंकी शिकार करता है .ऐसा बयान डॉ. जी.डी. देशमुख द्वारा दिया गया है।

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