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अंधविश्वास के चलते बाघिन के शव के साथ बर्बरता: पत्नियों को ‘वश में करने’ के लिए तांत्रिक ने दी थी सलाह

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पेंच टाइगर रिज़र्व, मध्यप्रदेश से चौंकाने वाला मामला
(यश कायरकर):
मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिज़र्व से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां अंधविश्वास के चलते दो व्यक्तियों ने एक मृत बाघिन के शव को क्षत-विक्षत कर दिया। आरोपियों ने बाघिन के दांत, पंजे और खाल का टुकड़ा सिर्फ इसलिए काटा, क्योंकि एक तांत्रिक ने उन्हें बताया था कि इससे वे अपनी पत्नियों को नियंत्रण में रख सकेंगे।

क्या है मामला?
वन विभाग को 26 अप्रैल को पेंच टाइगर रिज़र्व के बफर जोन में एक मृत बाघिन मिली थी। शुरुआती जांच में यह पाया गया कि बाघिन की मौत स्वाभाविक कारणों से हुई थी, लेकिन उसके पंजे, तीन नुकीले दांत और खाल का एक हिस्सा गायब था। वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुखबिरों की सूचना पर कार्रवाई की और पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया:
राज कुमार, झाम सिंह (तेलंगाना से गिरफ्तार), छबि लाल, रत्नेश पार्टे और मनीष उइके

तांत्रिक की सलाह पर की हरकत
पूछताछ के दौरान राज कुमार और झाम सिंह ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि एक तांत्रिक ने उन्हें बताया था कि बाघ के पंजे और दांत से विशेष तांत्रिक क्रिया करने से पत्नियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। राज ने कहा कि उसकी पत्नी “बहुत मनमानी” करती थी, और वह उसे ‘काबू में’ लाना चाहता था।

तीन दिन तक शव के साथ छेड़छाड़
राज और झाम ने पहले दिन शव देखा लेकिन पास में एक जीवित बाघ को देखकर पीछे हट गए। अगले दिन, वे फिर लौटे और बाघिन के दांत व पंजे काट लिए। तांत्रिक के कहने पर तीसरे दिन वे दोबारा आए और खाल का एक हिस्सा भी काटकर ले गए।

स्थानीय लोगों की सतर्कता से खुला राज
कुछ ग्रामीणों ने इस हरकत को देखा और वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अभी तक पांच लोग पकड़े जा चुके हैं, और तांत्रिक की तलाश की जा रही है।

वन विभाग की कड़ी प्रतिक्रिया
एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने कहा, यह मामला दर्शाता है कि अंधविश्वास किस हद तक लोगों को कानून तोड़ने और संरक्षित वन्यजीवों के साथ क्रूरता करने के लिए प्रेरित कर सकता है। यह न केवल गैरकानूनी है बल्कि नैतिक रूप से भी निंदनीय है।”

जांच जारी
आरोपियों को 3 मई को अदालत में पेश किया गया और उन्हें वन विभाग की हिरासत में भेज दिया गया है। अब इस पूरे अंधविश्वास-जाल में और कौन-कौन शामिल है, इसकी जांच जारी है।

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