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मदनापूर (ताडोबा अभयारण्य – चिमूर तालुका) का प्रवेशद्वार ग्रामीणों ने किया बंद

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जिला प्रतिनिधी ( यश कायरकर):
ताडोबा अभयारण्य के चिमूर तालुका अंतर्गत पळसगाव वन परिक्षेत्र कार्यालय की कैंपिंग साइट (विश्रामगृह) पर कार्यरत “झांसी रानी महिला बचत समूह” की मासिक आय से 5 प्रतिशत राशि ‘विकास कार्य’ के नाम पर वन समिति के बैंक खाते में जमा करने की शर्त लगाए जाने के कारण ग्रामीणों और महिला समूह की महिलाओं में भारी आक्रोश फैल गया। इस विरोध के चलते ग्रामीणों ने ताडोबा के चिमूर तालुका स्थित मदनापूर प्रवेशद्वार को पूरी तरह बंद कर दिया है। पिछले चार दिनों से इस गेट से एक भी पर्यटक ताडोबा में प्रवेश नहीं कर पाया है। जब तक यह शर्त रद्द नहीं की जाती, तब तक प्रवेशद्वार नहीं खोला जाएगा — ऐसा ठोस निर्णय ग्रामीणों ने लिया है, जिससे वन विभाग और ग्रामीणों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

सूत्रों के अनुसार, चंद्रपुर जिले का ताडोबा अभयारण्य पूरी दुनिया में बाघों के दर्शन के लिए प्रसिद्ध है। अकेले चिमूर तालुका में बफर जोन के अंतर्गत छह प्रवेशद्वार हैं — जिनमें निमढेला, अलीझांझा, कोलारा, मदनापूर, गोंडमोहाडी और पळसगाव शामिल हैं।
मदनापूर की कैंपिंग साइट पर पिछले 4–5 वर्षों से आने वाले पर्यटकों के भोजन की व्यवस्था ग्रामसभा के माध्यम से महिला बचत समूह को अनुबंध के आधार पर दी जाती है। मार्च महीने में हुई ग्रामसभा में झांसी रानी महिला बचत समूह को यह कार्य सौंपा गया। लेकिन इस बार वन परिक्षेत्र अधिकारी योगिता आत्राम द्वारा आदेश में यह नई शर्त जोड़ी गई कि समूह को अपनी मासिक आय का 5% हिस्सा वन समिति को विकास कार्यों के लिए देना होगा।
जैसे ही यह आदेश महिला समूह के हाथ में आया, उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि कैंपिंग साइट पर पर्यटकों द्वारा भोजन की मांग बहुत कम है, जिससे आय सीमित है। ऐसी स्थिति में 5% राशि देना समूह के लिए संभव नहीं है। उन्होंने इस शर्त को रद्द करने की मांग की, परंतु वन अधिकारी योगिता आत्राम ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह राशि भरनी ही होगी।
इस आदेश की अनदेखी और मांग के प्रति उपेक्षा के कारण अंततः 8 अप्रैल की सुबह महिला समूह और गांववासियों ने मिलकर मदनापूर गेट को बंद कर दिया। उन्होंने गेट के पास लकड़ियाँ और पत्थर रखकर रास्ता पूरी तरह से रोक दिया।
इस गेट से प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक ताडोबा में प्रवेश करते हैं, लेकिन भोजन के लिए बहुत कम लोग कैंपिंग साइट पर आते हैं, जिससे आय बहुत ही कम होती है। ऐसे में आय का 5% देना महिलाओं के लिए व्यावहारिक नहीं है।
मदनापूर गांव में 16 जिप्सी वाहन और उतने ही गाइड हैं, जो पर्यटकों के लिए काम करते हैं। गेट बंद होने से अब ये सभी लोग बेरोजगार हो गए हैं और घर पर ही बैठने को मजबूर हैं। यह मामला केवल महिला समूह और वन विभाग का नहीं रहा, अब यह स्थानीय रोजगार और ग्रामीणों के हक से जुड़ गया है। अगर यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो यह ताडोबा के पर्यटन व्यवसाय को भी प्रभावित कर सकता है।

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