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सिंदेवाही में फिर जंगली हाथी की एंट्री, एक बुज़ुर्ग को कुचलकर मार डाला

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जिला प्रतिनिधी (यश कायरकर):

शिंदेवाही में एंट्री कर चुके हाथी यो पर निगरानी के लिए शिंदेवाही वन परिक्षेत्र का एक गश्ती दल नियुक्त किया गया है। जो रात दिन इन हाथियों के पीछे रहकर उनकी निगरानी कर रहा है। और लोगों में जागरूकता और सावधानी बरतने की सूचनाओं दे रहा है। लेकिन परिसर के लोग इस और अनदेखी कर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। जबकि वन विभाग लोगों से सावधानी बरतने का अनुरोध कर रहा है।
हाथी द्वारा हमला कर मरा गया व्यक्ति वन विकास निगम सिंदेवाही के गढ़मौसी बिट, कक्ष क्रमांक 168 में, गांव से दूर जंगल में सौच के लिए गया था। परिसर में हाथियों का खतरा होते हुए भी जंगल में सौच के लिए बैठने की वजह से उनसे अपनी जान गंवानी पड़ी।

ओडिशा से आए टस्कर हाथियों ने सिंदेवाही तालुका के जाटलापूर मोठा रविवार सुबह, 15 जून 2025 को मारोती कवडू मसराम (उम्र 70 वर्ष) को मार गिराया, अभी भी टस्कर हाथियों का कहर जारी, पहले ही जानलेवा घटना से ग्रामीणों में दहशत बरकरार है
30 मई को ओडिशा से छत्तीसगढ़ होते हुए महाराष्ट्र के गढ़चिरोली और चंद्रपुर जिले में दाखिल हुए दो जंगली हाथियों ने अब पहली बार मृत्यु का कारण बनते हुए वन्यजीव संघर्ष को नया मोड़ दे दिया है। रविवार सुबह करीब 6 बजे सिंदेवाही तालुका के जाटलापूर मोठा गांव में एक बुज़ुर्ग व्यक्ति पर हमला कर हाथियों में से एक ने उन्हें कुचल दिया।
70 वर्षीय मारोती कवडू मसराम रोज की तरह शौच के लिए गांव के बाहरी क्षेत्र में गए थे, तभी यह दर्दनाक हादसा हुआ। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

15 दिनों में दूसरी बार क्षेत्र में घुसे हाथी

यह वही दो टस्कर हाथी हैं जिन्होंने 30 मई को सिंदेवाही में प्रवेश कर उत्पात मचाया था और फिर कुछ दिनों बाद गढ़चिरोली लौट गए थे। लेकिन 13 जून को सावली वनपरिक्षेत्र में पुनः देखे गए ये हाथी अब सिंदेवाही वनपरिक्षेत्र तक आ पहुँचे हैं।
वैनगंगा नदी पार कर, वे आसोलामेंढा जंगल क्षेत्र से होते हुए जाटलापूर मोठा गांव तक पहुँचे और वहीं यह दुर्घटना हुई।

वन विभाग और पुलिस की त्वरित कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और सिंदेवाही पुलिस मौके पर पहुँची। पंचनामा कर शव को शासकीय ग्रामीण अस्पताल, सिंदेवाही भेजा गया।

ग्रामीणों के अनुसार, इससे पहले बाघ हमले आम बात थी, लेकिन अब हाथियों की आक्रामकता से खतरा और डर दोनों बढ़ चुके हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि वनविभाग इन हाथियों के मूवमेंट को गंभीरता से नहीं ले रहा है। किसी भी तरह की चेतावनी प्रणाली या गश्ती नहीं थी, जिससे इस हादसे को टाला जा सकता था।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:

•गांवों में एलईडी वॉर्निंग बोर्ड और सायरन सिस्टम स्थापित किए जाएं।
•24×7 निगरानी और ट्रैकिंग यूनिट की नियुक्ति की जाए।
•विशेष प्रशिक्षित हाथी प्रबंधन टीम की तैनाती हो।
•वन्यजीवों से निपटने के लिए स्थानीय समुदाय को प्रशिक्षण दिया जाए।

यह पहली बार है जब चंद्रपुर जिले में हाथी के हमले से किसी की जान गई है, जिससे साफ ज़ाहिर होता है कि अब केवल बाघ ही नहीं, बल्कि हाथी भी नए ख़तरनाक वन्यजीव के रूप में सामने आ रहे हैं।

“जंगल अब केवल रहस्य और रोमांच नहीं, बल्कि सजगता और सुरक्षा की माँग भी करता है।”

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