
जिला प्रतिनिधि : ब्रह्मपुरी वन विभाग के अंतर्गत आने वाले तळोदी बालापुर वनपरिक्षेत्र के आलेवाही बीट के कक्ष क्रमांक 703, गंगासागर हेटी-आलेवाही क्षेत्र से गुजरने वाली गोसीखुर्द नहर में गिरे एक नर और एक मादा, लगभग चार से पाँच वर्ष आयु के दो युवा जंगली गौर (रानगवा) को वन विभाग एवं स्वाब संस्था द्वारा सफलतापूर्वक बचाकर जीवनदान दिया गया।

विस्तृत जानकारी के अनुसार, उश्राळा (मेंढा) खरकाळा क्षेत्र में गोसीखुर्द नहर में दो इंडियन गौर गिरने की सूचना स्थानीय किसानों को मिली। किसानों ने तत्काल इसकी जानकारी स्वाब संस्था और वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन कर्मचारी और स्वाब बचाव दल घटनास्थल पर पहुँचे।
उप वनसंरक्षक कुमार स्वामी (वन विभाग, ब्रह्मपुरी) के मार्गदर्शन में सहायक वन संरक्षक महेश गायकवाड़, प्रशिक्षु सहायक वन संरक्षक अरविंद जे., बायोलॉजिस्ट राकेश आहूजा तथा प्रशिक्षु वनपरिक्षेत्र अधिकारी पवार ने इस अभियान का नेतृत्व किया। स्वाब बचाव दल, वन कर्मचारी एवं वनमजदूरों के संयुक्त प्रयास से नहर में गिरे दोनों इंडियन गौर को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
यह बचाव कार्य दोपहर 11 बजे से रात 8 बजे तक लगभग 9 घंटे चला। नहर से बाहर निकालने के बाद ताडोबा व्याघ्र परियोजना के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. कुंदन पोचलवार द्वारा बेहोशी का इंजेक्शन देकर दोनों गौरों की चिकित्सीय जांच की गई। उपचार उपरांत दोनों को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। जंगल की ओर जाते हुए दोनों गौर तेज़ी से दौड़ते हुए निकल गए।
इस अभियान में स्वाब बचाव दल प्रमुख जीवेस सयाम, स्वाब के यश कायरकर, गोपाल कुंभले, नितीन भेंडाळे, गणेश गुरनुले, आदित्य नान्हे, स्वराज मोहुरले, गणेश गावतुरे, शुभम निकेशर और सुरज नेवारे ने रस्सियों और जाल की सहायता से उन्हें सुरक्षित नियंत्रित किया।
इस दौरान तळोदी वनपरिक्षेत्र के क्षेत्र सहायक अरविंद माने, वनरक्षक राजेंद्र भरणे, वनरक्षक पंडित मेकेवाड, सिंदेवाही वनपरिक्षेत्र के वनरक्षक सचिन चौधरी, संपूर्ण आर.आर.यू. टीम तथा वनमजदूर उपस्थित थे।
इस संबंध में वन्यजीव प्रेमी एवं ‘स्वाब फाउंडेशन’ के अध्यक्ष यश कायरकर ने कहा,“इस नहर पर वन्यजीवों की आवाजाही के लिए जगह-जगह कुछ दूरी पर पुल तथा नहर से बाहर निकलने के लिए सीढ़ियों की व्यवस्था करना अत्यंत आवश्यक है।
ऐसी घटनाएँ बार-बार हो रही हैं और इस विषय पर मीडिया में लगातार लिखा जा रहा है। इसके बावजूद प्रशासन और गोसीखुर्द निर्माण विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यदि शीघ्र गंभीरता से कदम नहीं उठाए गए तो वन्यजीवों की बड़ी जनहानि हो सकती है।”


