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परिसर में बाघों का अस्तित्व खतरे में, रातभर घूम रही हैं बाघ की तलाश में गाड़ियाँ!

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(क्या ये घूमने वाले शिकारी गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं? वन विभाग करेगा क्या कार्रवाई?)

यश कायरकर (जिला प्रतिनिधि):

ब्रह्मपुरी के अंतर्गत आने वाले तळोदी (बा.), उत्तर ब्रह्मपुरी, दक्षिण ब्रह्मपुरी और सिंदेवाही इन वनपरिक्षेत्रों में बीते कुछ दिनों से रातभर कई गाड़ियाँ बाघ की तलाश में घूमती नजर आ रही हैं। इससे स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र के बाघों के जीवन को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

तळोदी-बालापुर से आरमोरी रोड, मेंडकी से एकारा-शिंदेवाही रोड, पलसगांव (जाट) से आलेवाही/बालापुर रोड, ब्रह्मपुरी से गोवारपेठ-बालापुर रोड, घोडाझरी गेट से तलाव रोड — इन मार्गों पर रातभर गाड़ियों की आवाजाही बाघ के दर्शन के लिए जारी रहती है।

कई शौकीन लोग हर रात गाड़ियाँ लेकर इन सड़कों पर बाघ देखने के लिए निकलते हैं और बाघ दिखाई देने पर उसके फोटो व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं। इस पर सरकार कार्रवाई कर सकती है, लेकिन विभाग की ओर से इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने का प्रमुख कारण

एक ओर जहाँ कुछ वन्यजीव प्रेमी संगठन जंगलों और बाघों की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात विभाग को सहयोग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ समाजकंटक लोग रातभर जंगलों में घूमकर बाघों पर टॉर्च की रोशनी डालते हैं, उनके शिकार के पास जाकर फोटो और वीडियो बनाते हैं, या फिर जंगल के रास्ते पर चलते बाघ के सामने गाड़ी खड़ी कर उसका रास्ता रोकते हैं — जिससे वह मजबूर होकर गांव या खेतों की ओर भागता है।

इन गतिविधियों के कारण जंगल की रात की शांति भंग होती है और वन्यजीव गांवों या खेतों की ओर आने को विवश होते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की चिंगारी भड़कती है।

यदि इन घटनाओं पर तुरंत नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में न केवल वन विभाग और प्रशासन, बल्कि क्षेत्र के किसान व ग्रामीणों के जीवन को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। रातभर बाघों का पीछा करने वाले ही इस खतरे के लिए जिम्मेदार बनते जा रहे हैं।

बाघों के जीवन को खतरा, कुछ बाघ लापता होने की आशंका

विभाग की ओर से कई जगहों पर लापरवाही बरती जा रही है। अब यह शौकीन और भुरटे लोगों की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि वे जंगल के खोदतलाव (वॉटर होल्स), पानवठे और जंगल के ट्रैक रोड्स पर बड़े-बड़े हाई बीम टॉर्च लेकर घूम रहे हैं।

इसी बीच यह भी चर्चा है कि कुछ शिकारी गिरोह इस मौके का फायदा उठाकर रातभर जंगलों में सक्रिय हैं।

इससे क्षेत्र के कुछ बाघ गायब हो गए हैं — और यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में और भी बाघ लुप्त हो सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, विभाग के कुछ मजदूर या कर्मचारी ही इन गिरोहों को बाघों के लोकेशन की जानकारी देते हैं, जिससे वे आसानी से अपना काम अंजाम देते हैं।

कुछ संदिग्ध गाड़ियों पर जब वन्यजीव प्रेमियों ने नजर रखी और उनका पीछा किया, तो पाया गया कि वे जंगल में बाघ से मात्र 10 फुट की दूरी पर गाड़ी खड़ी कर वीडियो बना रहे थे।

“यह कहीं न कहीं रुकना ज़रूरी है और इस बारे में पूरी जानकारी लेकर जंगल क्षेत्र में बाघों या वन्यजीवों के पीछे घूमने वाले दोषियों पर निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।”
— लक्ष्मी शाह, वन परिक्षेत्र अधिकारी, तळोधी (बा.)

इनकी तस्वीरें और वीडियो वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे जा चुके हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि अधिकारी इस पर क्या ठोस कार्रवाई करते हैं।

 

 

 

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