
अधिकारियों को बदनाम करने की साजिश की आशंका जताई गई
चंद्रपुर : (मोहम्मद सुलेमान बेग)
ताडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व (TATR) के पर्यटन प्रबंधक गोविंदा असोपा को उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से विभागीय जांच में पूरी तरह क्लीन चिट मिल गई है। यह स्वतंत्र जांच उन आरोपों के बाद कराई गई थी, जो पिछले महीने कुछ रिसॉर्ट और होमस्टे संचालकों द्वारा लगाए गए थे।

यह जांच TATR के फील्ड डायरेक्टर प्रभु नाथ शुक्ला के आदेश पर शुरू की गई थी और इसका संचालन डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) सचिन शिंदे द्वारा किया गया। जांच रिपोर्ट हाल ही में राज्य के प्रधान मुख्य वन्यजीव संरक्षक (Chief Wildlife Warden) एम.एस. रेड्डी को सौंपी गई है।
आरोपों में नहीं मिला कोई ठोस सबूत
जांच रिपोर्ट के अनुसार, गोविंदा असोपा पर लगाए गए वित्तीय अनियमितताओं, चुनिंदा टूर ऑपरेटरों को लाभ पहुंचाने, रिसॉर्ट संचालक को धमकाने और दुर्व्यवहार जैसे आरोपों के समर्थन में कोई भी ठोस सबूत नहीं मिला।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अलग-अलग नामों से दी गई कई शिकायतें वास्तव में एक-सी सामग्री और दस्तावेजों के साथ भेजी गई थीं, जिससे उनकी प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है।
शिकायतकर्ता के बयान कमजोर
जांच के दौरान दर्ज बयानों में शिकायतकर्ता बांदा अरविंद राव ने स्वीकार किया कि उनके पास आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। वे सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो के स्रोत तक की जानकारी भी नहीं दे सके।इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया कि शिकायत पत्रों पर झूठे हस्ताक्षर करवाए गए थे, जिसे एक व्यक्ति ने स्वयं स्वीकार किया।
शिकायतकर्ता पर पहले से वन अपराध का मामला
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अरविंद राव वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत दर्ज एक वन अपराध (शिकार से जुड़ा मामला) में आरोपी हैं। उनका होमस्टे न तो महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल (MTDC) में पंजीकृत है और न ही वन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र है।इसके अलावा, पर्यटकों से अधिक शुल्क वसूलने के कारण उनके यूज़र आईडी पहले छह महीनों के लिए ब्लॉक किए जा चुके थे।
छवि खराब करने की साजिश की आशंका
जांच में यह भी पाया गया कि बिना अनुमति सोशल मीडिया से महिलाओं की तस्वीरों का दुरुपयोग किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को गुमनाम शिकायतों में घसीटने का प्रयास किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यह सब जांच को भटकाने और ताडोबा प्रबंधन की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से किया गया प्रतीत होता है।
झूठी शिकायतों पर कार्रवाई की सिफारिश
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बिना ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के की गई शिकायतों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, झूठी, प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण शिकायतें करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है।
सभी शिकायतें बंद करने की अनुशंसा
जांच के निष्कर्षों के आधार पर फील्ड डायरेक्टर ने गोविंदा असोपा के खिलाफ दर्ज सभी शिकायतों को औपचारिक रूप से बंद करने और उन्हें पूर्णतः दोषमुक्त घोषित करने की अनुशंसा की है।





